Description

यह पुस्तक ‘परिचय’ की पहली कृति है, जिसमें वह अपनी सोच, अनुभव और भावनाओं को दर्शाने का प्रयास करता है। सरल हिंदुस्तानी भाषा में लिखी गई यह रचनाएँ विभिन्न पहलुओं—प्रेम, संघर्ष, समाज, विचार और आत्म-खोज—को सहजता से प्रस्तुत करती हैं। पुस्तक को विभिन्न वर्गों में बाँटा गया है, ताकि पाठक अपनी पसंद के अनुसार पढ़ सके। कहीं प्रेम की मासूमियत है, तो कहीं जीवन की कठोर सच्चाइयाँ; कहीं समाज पर प्रश्न हैं, तो कहीं खुद से संवाद। ‘परिचय’ अपनी पहचान खुद तय करने की बात करता है और यही इस पुस्तक का मूल भाव भी है। यह सिर्फ रचनाओं का संग्रह नहीं, बल्कि एक यात्रा है—एक ऐसे लेखक की, जो अभी सीख रहा है, समझ रहा है और अपने शब्दों के माध्यम से दुनिया को देखने की कोशिश कर रहा है।

Additional Information
Weight 0.35 kg
Dimensions 20.32 × 12.7 × 1.5 cm
Binding Type

Paperback

Languages

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About Author

‘परिचय’ एक युवा लेखक हैं। ‘परिचय’ उनका pen name है, जिसे उन्होंने खुद चुना है। उन्हें बचपन से ही कहानियाँ और कविताएँ पढ़ने और लिखने का शौक रहा है। धीरे-धीरे यही शौक उनकी आदत बन गया। वे खुद को अभी सीखने की अवस्था में मानते हैं। उनका मानना है कि अभी उन्हें दुनिया को समझना…

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