संस्कार सरोवर – भाग 1 हृदय को छू लेने वाले हिंदी निबंधों और कहानियों का एक संग्रह है, जो विशेष रूप से माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी लोगों के लिए रचा गया है जो बच्चों के विचारों और व्यक्तित्व को आकार देते हैं। इस पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में जीवन के आवश्यक मूल्यों, बचपन की आम उलझनों, और वास्तविक जीवन से प्रेरित स्थितियों पर चर्चा की गई है, जो बच्चों को करुणा, भावनाओं की अभिव्यक्ति, व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और आत्मबोध का महत्व समझने में मदद करती है।
आकर्षक कहानियों और गहरी संवादात्मक शैली के माध्यम से यह पुस्तक न केवल बच्चों में संवेदनशीलता, स्पष्ट सोच और नैतिक आधार को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित करती है, बल्कि पाठकों को स्वयं के मार्गदर्शक और मार्गप्रदर्शक रूप की भूमिका पर भी आत्मचिंतन करने का अवसर देती है।
यह एक ‘संस्कारों का सरोवर’ है — ऐसे शाश्वत मूल्यों का भंडार, जिन्हें आज के युग की भाषा, संदर्भ और सादगी के साथ प्रस्तुत किया गया है।
संस्कार सरोवर – भाग 1: संवेदना, संस्कार और समझदारी
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रजनीश कुमार एक संवेदनशील, विचारशील और भावनाओं से जुड़ा लेखक हैं, जो जीवन के छोटे-छोटे पहलुओं में छिपे बड़े अर्थों को समझने और सरल शब्दों में प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। उनका मानना है कि बच्चों और युवाओं को सही दिशा, विचार और भावनात्मक समझ देना केवल एक ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि एक आवश्यक सेवा है।
लेखक का जीवन अनुभव विविध रहा है—उन्होंने शिक्षा, समाज, नैतिकता, आध्यात्मिकता, और जीवन मूल्यों को नज़दीक से देखा और जिया है। उनके लेखन में समाज के प्रति जागरूकता, मानवीय करुणा, और बच्चों के मानसिक विकास के लिए गहरी चिंता स्पष्ट रूप से झलकती है। वे मानते हैं कि आज का बच्चा ही कल का समाज गढ़ेगा—इसलिए उसका सोचने का ढंग, समझने की शक्ति और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होनी चाहिए।
रजनीश कुमार का यह लेखन सफर एक साधारण सोच से शुरू हुआ था—“यदि हम अपने बच्चों को केवल किताबी ज्ञान ही देते रहेंगे, तो वे जीवन की वास्तविकता से अनभिज्ञ रह जाएंगे।” इसी सोच ने उन्हें प्रेरित किया कि वे अपनी कलम के माध्यम से बच्चों के लिए ऐसे विषयों पर लिखें जो न केवल उन्हें सोचने पर मजबूर करें, बल्कि उनके अंदर मानवीय मूल्यों और व्यावहारिक समझ का विकास भी करें।
उनकी लेखनी में भावनाएँ मुखर होती हैं, विचार सुलझे हुए होते हैं और भाषा सहज होती है। उन्होंने बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को ध्यान में रखकर ऐसे विषयों को छुआ है जो रोज़मर्रा के जीवन में आम होते हुए भी अक्सर अनदेखे रह जाते हैं—जैसे कि भोजन की बर्बादी, कॉमन सेंस की कमी, डिजिटल लत, पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनहीनता, और पारिवारिक मूल्यों का क्षरण।
इस पुस्तक के माध्यम से वे बच्चों और युवाओं को आत्ममंथन, करुणा, समय की क़द्र, संबंधों की समझ और सोचने की स्वतंत्रता की दिशा में ले जाना चाहते हैं। साथ ही, उन्होंने यह पुस्तक उन सभी शिक्षकों, अभिभावकों और मार्गदर्शकों को समर्पित की है जो बच्चों के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं।
रजनीश कुमार आज भी सीखने, सोचने और लिखने की यात्रा पर हैं—हर अनुभव को एक नई दृष्टि से देखने और उसे भावों में पिरोकर साझा करने के लिए समर्पित।
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Description
Additional Information
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.6 × 14 × 2.5 cm |
| Binding Type | Paperback |
| Languages | |
| Publishers |
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