Description

“ये राख” वैराग्य और आत्मबोध की एक शांत, गहरी कथा है। यह कहानी भृगुराज की है—एक साधारण व्यक्ति, जो काशी के घाटों से हिमालय की ऊँचाइयों तक की यात्रा करता है, पर असल में अपने ही भीतर उतरता है।
मणिकर्णिका की जलती चिताएँ, अघोरियों का मौन, और राख में छिपा जीवन का सत्य भृगुराज को उसके मोह से धीरे-धीरे अलग करता है। हिमालय में पहुँचकर वह केवल प्रकृति की कठोरता से नहीं, बल्कि अपने भय, स्मृतियों और पहचान से भी टकराता है।
यह पुस्तक उत्तर नहीं देती—प्रश्न छोड़ जाती है।
यह मोक्ष नहीं सिखाती—सत्य से सामना कराती है।
“ये राख”
एक यात्रा,
जो शब्दों से शुरू होकर
मौन में समाप्त होती है।

Additional Information
Weight 0.5 kg
Dimensions 20.32 × 12.7 × 1.5 cm
Binding Type

Paperback

Languages

Publishers

About Author

नाम: विहान (आदित्य सिंह) जन्म: 22 जनवरी 2009,हरदोई,उत्तर प्रदेश आयु: 16 वर्ष शिक्षा: कक्षा 11, सेठ एम.आर. जयपुरिया स्कूल विहान (आदित्य सिंह) एक युवा विद्यार्थी-लेखक हैं, जिनकी लेखनी वास्तविक जीवन, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सच्चाइयों से प्रेरित है। लेखन के प्रति उनकी रुचि उन्हें पारिवारिक संस्कारों से प्राप्त हुई, क्योंकि उनकी माता भी लेखन से…

Reviews
Ratings

0.0

0 Product Ratings
5
0
4
0
3
0
2
0
1
0

Review this product

Share your thoughts with other customers

Write a review

Reviews

There are no reviews yet.