“कोई सुन रहा है?”
शायद आपने भी कभी ये सवाल ख़ुद से पूछा होगा…
भीड़ के बीच, या किसी ख़ामोश रात में।
यह किताब सिर्फ़ शायरी नहीं है—
यह उन एहसासों की आवाज़ है
जिन्हें आपने हमेशा अपने अंदर दबाकर रखा।
कभी बिना वजह उदास होना,
किसी को सब कुछ कहकर भी न कह पाना,
किसी के होते हुए भी अकेला महसूस करना…
अगर ये सब आपने जिया है—
तो यह किताब आपकी है।
यहाँ मोहब्बत है… पर पूरी नहीं,
यहाँ दर्द है… पर चीख़ता नहीं,
यहाँ ख़ामोशी है… जो बहुत कुछ कहती है।
हर पन्ने पर आपको अपने ही हिस्से मिलेंगे—
कुछ भूले हुए, कुछ छुपाए हुए,
और कुछ वो… जिन्हें आप कभी समझ ही नहीं पाए।
यह किताब आपको जवाब नहीं देगी,
बस आपके सवालों के साथ बैठ जाएगी।
और शायद,
जब आप इसे बंद करेंगे—
तो दिल से एक आवाज़ आए…
“हाँ… कोई तो सुन रहा है।” 🌙

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