यह कथा, भगवान् विष्णु एवं माँ तुलसी की पौराणिक गाथा को समसामयिक दृष्टि में पुनः गढ़ती है। यह विचार स्थापित करती है कि कर्मफल अटल है। कृष्णभक्त तमन्ना, पति की अचानक हुई मृत्यु से बिखर जाती है। बारम्बार दैवीय शक्ति उसे आत्महत्या करने से रोकती है और एक नया दायित्व देती है–अपने पति के जीवन की गोपनीय कुत्सित कांडों को उजागर करने की। जांच–पड़ताल के दौरान तमन्ना को रहस्यों और कुकर्मों का मकड़जाल मिलता है, जो उसके प्रेम और न्याय की भावना को एक मझधार में डाल देता है। त्रिभंगीलाल कृष्ण की रची हुई लीला में अब उसे यह तय करना है कि जिस व्यक्ति के लिए वह शोक मना रही है, क्या वह वास्तव में उस योग्य है? यह कहानी केवल प्रेम और बलिदान के अंतर्द्वंद की नहीं, बल्कि विश्वासघात, न्याय और आत्मोत्थान् की गहरी परतों को भी उधेड़ती है। यह हमें स्मरण कराती है कि प्राचीन कथाएं आज भी हमारे असंतुलित जीवन और दिग्भ्रमित समाज के लिए मार्गदर्शक बन सकती हैं।
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दृष्टांत-10 जुलाई 2022 (DRISHTANT 10 July 2022): नियति और निर्णय (Niyati aur nirnay)
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Description
Additional Information
| Weight | 0.5 kg |
|---|---|
| Dimensions | 21.6 × 14 × 2.5 cm |
| Binding Type | Paperback |
| Languages | |
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