Description

यह कथा, भगवान् विष्णु एवं माँ तुलसी की पौराणिक गाथा को समसामयिक दृष्टि में पुनः गढ़ती है। यह विचार स्थापित करती है कि कर्मफल अटल है। कृष्णभक्त तमन्ना, पति की अचानक हुई मृत्यु से बिखर जाती है। बारम्बार दैवीय शक्ति उसे आत्महत्या करने से रोकती है और एक नया दायित्व देती है–अपने पति के जीवन की गोपनीय कुत्सित कांडों को उजागर करने की। जांच–पड़ताल के दौरान तमन्ना को रहस्यों और कुकर्मों का मकड़जाल मिलता है, जो उसके प्रेम और न्याय की भावना को एक मझधार में डाल देता है। त्रिभंगीलाल कृष्ण की रची हुई लीला में अब उसे यह तय करना है कि जिस व्यक्ति के लिए वह शोक मना रही है, क्या वह वास्तव में उस योग्य है? यह कहानी केवल प्रेम और बलिदान के अंतर्द्वंद की नहीं, बल्कि विश्वासघात, न्याय और आत्मोत्थान् की गहरी परतों को भी उधेड़ती है। यह हमें स्मरण कराती है कि प्राचीन कथाएं आज भी हमारे असंतुलित जीवन और दिग्भ्रमित समाज के लिए मार्गदर्शक बन सकती हैं।

Additional Information
Weight 0.5 kg
Dimensions 21.6 × 14 × 2.5 cm
Binding Type

Paperback

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About Author

लेखक नवनीत कुमार, अपने पहले उपन्यास “नोटबंदी: एक सर्जिकल स्ट्राइक” की अपार सफलता के बाद, अब अपनी दूसरी रचना के साथ पाठकों के समक्ष हैं। पहली कृति जहाँ तथ्य और कल्पना का सम्मिश्रण थी, वहीं इस बार वे एक प्राचीन आख्यान को आधुनिक दृष्टिकोण एवं विश्लेषण के साथ प्रस्तुत कर रहे हैं। उनका मानना है…

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