स्वामी सुमनानन्दनाथ
(Dr. Suman Kumar Das)स्वामी सुमनानन्दनाथ एक गृहस्थ–ऋषि परंपरा के साधक,
आधुनिक योग–तन्त्र अन्वेषक, और
भारत की मिट्टी से जुड़े आध्यात्मिक–कृषि नवाचारकर्ता हैं।आपका जीवन–मार्ग केवल ध्यान और सिद्धि तक सीमित नहीं,
बल्कि परिवार, समाज, संस्कृति और धरती–माता के प्रति उत्तरदायित्व में गहराई से निहित है।25+ वर्षों तक विश्व के अनेक देशों में कार्य करते हुए—
ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान, दिल्ली और फिर
खजुराहो में “ललिता दिव्याश्रम” की स्थापना —
आपने दिखाया कि
गृहस्थ जीवन और आध्यात्मिक उत्कर्ष विरोधी नहीं,
बल्कि एक ही साधना के दो पंख हैं।आपके शोध का केंद्र है—गृहस्थ–योग और मंत्र–साधनादेवत्व और दैनिक जीवन का संतुलनभारतीय कृषि–तत्त्व, प्रकृति और चेतनामन और मंत्र का न्यूरो–विज्ञानग्राम–भारत और आत्मनिर्भर गृहस्थ जीवन“जप, तप, सेवा, श्रम और सत्य–संतुलन” को
आपने साधना का वास्तविक अर्थ माना है।> “घर ही पहला आश्रम है,
माता–पिता प्रथम गुरु हैं,
रसोई यज्ञकुण्ड है,
और परिवार जीवन–धर्म का पथशाला।”आपने 41-Day Mantra Yoga System,
Trigunātmak Agriculture, और
Sonic–Spiritual Farming जैसे अनूठे मार्ग
भारत और विश्व के साधकों के लिए विकसित किए।---मिशनगृहस्थ जीवन को
साधना, सेवा, संस्कार, संवेदनशीलता और स्वावलम्बन के साथ
फिर से प्रतिष्ठित करना —
ताकि हर घर मंदिर बने और हर जीवन एक गीता बन जाए।---Current WorkLalita Divyāshram, KhajurahoMantra Yoga Global MovementGau–Krishi–Vanijyam ResearchSpiritual Futurism & Culture Renaissance---A Line That Defines Him> “संन्यास जंगल में नहीं,
गृहस्थ की जिम्मेदारियों में सिद्ध होता है।”
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